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Short Stories and Microstories

edited April 2015 in Miscellaneous
@thescientist @misseyre @wwg_reloaded and others...lets make this thread for sharing short and microstories :)
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Comments

  • edited April 2015
    @whysoserious Will share poems.... no issues na ?
  • @wwg_reloaded i guess no one has any problem..you are most welcome.. :)
  • edited April 2015
    @wwg_reloaded i guess no one has any problem..you are most welcome.. :)
    @whysoserious u made this thread for stories only so i thought its better to ask..... =))

    So here goes my first contribution....

    सर्दी भरे मौसम में सूर्य का ताप मालूम नहीं पड़ता,
    कोहरे से भरे शहर में, साथ निभाने वाला दोस्त नहीं मिलता,
    अकेले चलने वाले राही,
    तुझे मंजिल का पता क्यों नहीं मिलता।

    देख परिंदों झुण्ड आकाश में उड़ा जा रहा है,
    किन्तु न जाने क्यों,
    ये इस देश का नहीं लगता।

    क्या ये पक्षी अपनों को छोड़ आये हैं,
    या इन्हे भी गरीबी ने बाहर धकेल दिया,
    विचारों के इस उथल-पुथल में,
    मुझे कोई जवाब क्यों नहीं मिलता ।

    चाहता हूँ पूछना कि,
    रुको चिड़िया,
    इतनी जल्दी में कँहा जा रहे हो,
    मित्रों से मिलने या उन्हें छोड़ जा रहे हो,
    क्या मातृभूमि न पुकारती तुम्हे,
    कि अपना देश किन हाथों में छोड़ चले जा रहे हो

    प्रश्न पूछने का मेरा अभिप्राय सरल था,
    मैं स्वयं ढूंढ न सका जो जवाब,
    इस माध्यम जानने का था प्रयास,
    शायद परिंदे कर जाएँ मेरा उद्धार।

    तीस बरस पहले,
    माँ ने रोका था,
    बाबू जी ने पूछा था,
    परन्तु अपनी जिद के आगे,
    मैंने न कुछ सोचा था,
    उज्जवल भविष्य का सपना थामे,
    हर रिश्ते को मैंने छोड़ा था,
    छोड़ दिया था घर आँगन सब,
    निकल पड़ा मैं विश्व-विजय को।

    हाँ मिली थी सफलता भी,
    पर चुकाई मैंने कीमत भी थी,
    और तेज भागती जिंदगी ने,
    मौका भी तो न दिया था सोचने का।

    हाँ डर तो असफलता का भी था,
    तभी तो सपनो की खातिर,
    दिन रात एक किया था,
    पर जब लगा के अंधकार छंट गया है,
    समय ने फिर दोराहे पे ला खड़ा किया है,
    धुंध ख्वाबों से छंट गयी है,
    पर सपने खुद धुँआ हो गए हैं।
  • edited April 2015
    सिंदूर की लाज

    पति की बाहों में परायी औरत को झूलते
    देख स्तब्ध रह गयी । आँखों से समुन्दर बह
    निकला ।
    दूसरे दिन सिंदूर मांग में भरते समय अतीत में
    दस्तक देने पहुँच गयी।
    "माँ, ये सिंदूर मांग और माथे पर लगाने के
    बाद गले पर क्यों लगाती हो । "
    माँ रोज रोज के मासूम सवाल से खीझ कह
    बैठी थी-" सौत के लिये ।"
    आज आंसू ढुलकाते हुये वह भी गले पर सिंदूर का
    टिका लगा लीं ।।
    बगल बैठी उसकी दस साल की मासूम बेटी ने
    वही सवाल किया जो कभी उसने अपनी
    माँ से किया था ।
    माँ मुस्कराते हुये बोली- "माँ दुर्गा से
    शक्ति मांग रही हूँ , जैसे सिंदूर की लाज रख
    सकूँ । "

    Edit : hehehe @wwg_reloaded
  • सिक्के के दो पहलू...

    सदा शीशम के पेड़ के साथ रहने वाली अमरबेल
    आज शीशम के कटते ही सूख गयी थी।यह
    परजीविता थी या अमरप्रेम।
  • सिक्के के दो पहलू...

    सदा शीशम के पेड़ के साथ रहने वाली अमरबेल
    आज शीशम के कटते ही सूख गयी थी।यह
    परजीविता थी या अमरप्रेम।
    behtareen !! one of the best short stories I have read in a long long time.

  • "कुछ देर साथ तो बैठो ज़रा"
    "ना , कोई देख लेगा यहाँ "

    "तो हाथ ही थामो ज़रा "
    "ना, क्या कहेगा ये जहाँ "

    "एक नज़र देख लो मुझको ज़रा "
    "ना, दस्तूर ऐसा होता है कहाँ "

    "दो कदम तो साथ चल लो ज़रा "
    "ना, जग देख लेगा पैरों के निशाँ "

    "एक दफा नाम मेरा लो ज़रा "
    "ना , परायों के नाम नहीं लेते यहाँ "

    - अभिनव
  • मैं रोज़ मनाया करूँ ,
    तुम बस ना करती रहो |
    बस इसी मीठे बहाने ,
    साँसों की दूरियां भरती रहो |

    तुम बस ना करती रहो |
    तुम बस ना करती रहो ||

    - अभिनव
  • This is my favorite short story of all time..elegance in minimum words

    "The last man on Earth sat alone in a room. There was a knock on the door..." - Knock by Fredric Brown
  • Jo Adhuri Reh Gayi Thi Wo Kahani Sochna,
    Kabhi Baithkar Tanha, Apni Baatein Purani Sochna...!!!!
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