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Hobbies - Sher -O- Shayari

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  • लाओ कहीं से आग, मशालों के वास्ते कब से तरस रहे हैं उजालों के वास्ते...

    बिकने को जो भी आया था मेले में बिक गया एक हम ही बच गए थे दलालो के वास्ते...

    गोया कि हम मिसाल हुए आदमी नहीं इनके कभी उनके मिसलो क् वास्ते ....
    सिक्के जमा तमाम हुए जिसके लाश पर निकला था घर से वो तो निवालो के वास्ते... :)
    Waah!
  • sharaab e shauk ko masti mein laake pita hoon
    main masira ki nazar se chhupa ke pita hoon
    rakoon se jo bache sajde mein jaake pita hoon
    wo rind hoon jo khuda ko bhi dikha ke pita hoon
  • दूर ही से सागर जिसे हर कोई माने
    पानी है वो या रेत है यह कौन जाने
    जैसे के दिन से रैन अलग है
    सुख है अलग और चैन अलग है
    पर जो यह देखे वो नैना अलग है
    चैन है तो अपना सुख है पराये
  • रात आ जाए तो फिर तुझ को पुकारूँ या-रब
    मेरी आवाज़ उजाले में बिखर जाती है
    Waah
  • रात आ जाए तो फिर तुझ को पुकारूँ या-रब
    मेरी आवाज़ उजाले में बिखर जाती है
    Waah
    Waah
  • अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
    जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

    तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा
    दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँ इतने हिजाबों में मिलें

    आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर
    क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें

    अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़'
    जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें
  • अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
    जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

    तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा
    दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँ इतने हिजाबों में मिलें

    आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर
    क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें

    अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़'
    जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें
    हैं रवाँ उस राह पर जिस की कोई मंज़िल न हो
    जुस्तुजू करते हैं उस की जो हमें हासिल न हो

    दश्त-ए-नज्द-ए-यास में दीवानगी हो हर तरफ़
    हर तरफ़ महमिल का शक हो पर कहीं महमिल न हो

    वहम ये तुझ को अजब है ऐ जमाल-ए-कम-नुमा
    जैसे सब कुछ हो मगर तू दीद के क़ाबिल न हो

    वो खड़ा है एक बाब-ए-इल्म की दहलीज़ पर
    मैं ये कहता हूँ उसे इस ख़ौफ़ में दाख़िल न हो

    चाहता हूँ मैं 'मुनीर' इस उम्र के अंजाम पर
    एक ऐसी ज़िंदगी जो इस तरह मुश्किल न हो
  • एक सीता की रिफ़ाक़त है तो सब कुछ पास है
    ज़िंदगी कहते हैं जिस को राम का बन-बास है |
  • Mai Laila kammal...
    Tu daroga dhamaal...

    :trollface: :trollface:

  • लाओ कहीं से आग, मशालों के वास्ते कब से तरस रहे हैं उजालों के वास्ते...

    बिकने को जो भी आया था मेले में बिक गया एक हम ही बच गए थे दलालो के वास्ते...

    गोया कि हम मिसाल हुए आदमी नहीं इनके कभी उनके मिसलो क् वास्ते ....
    सिक्के जमा तमाम हुए जिसके लाश पर निकला था घर से वो तो निवालो के वास्ते... :)
    Waah!
    Thnx :smiley:
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