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Hobbies - Sher -O- Shayari

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Comments

  • Is thread ka ab tak ka best shayari!!

    खाक़-ए-उम्मीद में उंगलियाँ फिराते कोई चिंगारी ढूंढता हूँ

    फिर कोई ख्वाब जलाना है कि रात रोशनी मांगती है
    This too one is my favourite.

    Mana ke teri deed ke kaabil nahin hun main
    Tu mera shauk dekh mera intezaar dekh

    Translated as:
    granted that I may not worthy of your sight
    look at my passion, and look at my perseverance
    Aur yeh shayari Manmohan Singh ne Sushma Swaraj ko bola tha Parliament mein. :D
  • कि अब लौट भी आओ गुलिस्तां से वापस
    यहां शहर मे दिल मुर्झाने लगे हैं
    उल्लुओं ने गुलिस्ताँ कर दिया आबाद
    @Aapke Pitaji आये हैं करने गुलिस्तां बर्बाद .. :trollface:
    Bas ek he @बादशाह kafi tha, barbad gulistan karne ko
    Har thread pe @बादशाह baitha hai, anjaam i gulistan kya hoga
  • कि अब लौट भी आओ गुलिस्तां से वापस
    यहां शहर मे दिल मुर्झाने लगे हैं
    उल्लुओं ने गुलिस्ताँ कर दिया आबाद
    @Aapke Pitaji आये हैं करने गुलिस्तां बर्बाद .. :trollface:
    Bas ek he @बादशाह kafi tha, barbad gulistan karne ko
    Har thread pe @बादशाह baitha hai, anjaam i gulistan kya hoga
    खाक़-ए-उम्मीद में उंगलियाँ फिराते कोई चिंगारी ढूंढता हूँ

    फिर कोई ख्वाब जलाना है कि रात रोशनी मांगती है
  • कि अब लौट भी आओ गुलिस्तां से वापस
    यहां शहर मे दिल मुर्झाने लगे हैं
    उल्लुओं ने गुलिस्ताँ कर दिया आबाद
    @Aapke Pitaji आये हैं करने गुलिस्तां बर्बाद .. :trollface:
    Bas ek he @बादशाह kafi tha, barbad gulistan karne ko
    Har thread pe @बादशाह baitha hai, anjaam i gulistan kya hoga
    खाक़-ए-उम्मीद में उंगलियाँ फिराते कोई चिंगारी ढूंढता हूँ

    फिर कोई ख्वाब जलाना है कि रात रोशनी मांगती है
    Chingari ko bread pe laga ke kha jaao ghalib
    Akhir chingari bhi toh cheese hai
  • edited November 2018
    कि अब लौट भी आओ गुलिस्तां से वापस
    यहां शहर मे दिल मुर्झाने लगे हैं
    उल्लुओं ने गुलिस्ताँ कर दिया आबाद
    @Aapke Pitaji आये हैं करने गुलिस्तां बर्बाद .. :trollface:
    Bas ek he @बादशाह kafi tha, barbad gulistan karne ko
    Har thread pe @बादशाह baitha hai, anjaam i gulistan kya hoga
    खाक़-ए-उम्मीद में उंगलियाँ फिराते कोई चिंगारी ढूंढता हूँ

    फिर कोई ख्वाब जलाना है कि रात रोशनी मांगती है
    Chingari ko bread pe laga ke kha jaao ghalib
    Akhir chingari bhi toh cheese hai
    चिंगारी से आग लगती है
    और आग का क्या है ... पल दो पल में लगती है ..
    बुझते बुझते एक जमाना लगता है :blush:
  • क्यों फिर रहे हो कैफ़ ये ख़तरे का घर लिए
    ये कांच का शरीर ये काग़ज़ का सर लिए

    शोले निकल रहे हैं गुलाबों के जिस्म से
    तितली न जा क़रीब ये रेशम के पर लिए

    जाने बहार नाम है लेकिन ये काम है
    कलियां तराश लीं तो कभी गुल क़तर लिए

    रांझा बने हैं, कैस बने, कोहकन बने
    हमने किसी के वास्ते सब रूप धर लिए

    ना मेहरबाने शहर ने ठुकरा दिया मुझे
    मैं फिर रहा हूं अपना मकां दर-ब-दर लिए

    >:)
  • क्यों फिर रहे हो कैफ़ ये ख़तरे का घर लिए
    ये कांच का शरीर ये काग़ज़ का सर लिए

    शोले निकल रहे हैं गुलाबों के जिस्म से
    तितली न जा क़रीब ये रेशम के पर लिए

    जाने बहार नाम है लेकिन ये काम है
    कलियां तराश लीं तो कभी गुल क़तर लिए

    रांझा बने हैं, कैस बने, कोहकन बने
    हमने किसी के वास्ते सब रूप धर लिए

    ना मेहरबाने शहर ने ठुकरा दिया मुझे
    मैं फिर रहा हूं अपना मकां दर-ब-दर लिए

    >:)
    Waah :mrgreen:
  • क्यों फिर रहे हो कैफ़ ये ख़तरे का घर लिए
    ये कांच का शरीर ये काग़ज़ का सर लिए

    शोले निकल रहे हैं गुलाबों के जिस्म से
    तितली न जा क़रीब ये रेशम के पर लिए

    जाने बहार नाम है लेकिन ये काम है
    कलियां तराश लीं तो कभी गुल क़तर लिए

    रांझा बने हैं, कैस बने, कोहकन बने
    हमने किसी के वास्ते सब रूप धर लिए

    ना मेहरबाने शहर ने ठुकरा दिया मुझे
    मैं फिर रहा हूं अपना मकां दर-ब-दर लिए

    >:)
    Waah :mrgreen:
    W hata do,
    #aah :wink:
  • क्यों फिर रहे हो कैफ़ ये ख़तरे का घर लिए
    ये कांच का शरीर ये काग़ज़ का सर लिए

    शोले निकल रहे हैं गुलाबों के जिस्म से
    तितली न जा क़रीब ये रेशम के पर लिए

    जाने बहार नाम है लेकिन ये काम है
    कलियां तराश लीं तो कभी गुल क़तर लिए

    रांझा बने हैं, कैस बने, कोहकन बने
    हमने किसी के वास्ते सब रूप धर लिए

    ना मेहरबाने शहर ने ठुकरा दिया मुझे
    मैं फिर रहा हूं अपना मकां दर-ब-दर लिए

    >:)
    Waah :mrgreen:
    W hata do,
    #aah :wink:
    :D
  • क्यों हक़ीक़त बयान करता है
    अपनी ख़तरे में जान करता है

    वो ही पाता है ज़िन्दगी का मज़ा
    दिल को जो आसमान करता है

    इतना क़ाबिल नहीं हुआ है अभी
    जितना खुद पे गुमान करता है

    ख़ुद सफ़ाई से झूठ बोल चुका
    मेरे आगे ‘कुरान’ करता है

    मुझको है अपनी मुफ़लिसी पे ग़ुरूर
    तू जो दौलत पे शान करता है
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