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Hobbies - Sher -O- Shayari

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  • जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
    मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता

    ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना, हामी भर लेना
    बहुत हैं फ़ायदे इसमें मगर अच्छा नहीं लगता

    मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
    किसी का भी हो सर, क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता

    बुलंदी पर इन्हें मिट्टी की ख़ुशबू तक नहीं आती
    ये वो शाखें हैं जिनको अब शजर अच्छा नहीं लगता

    ये क्यूँ बाक़ी रहे आतिश-ज़नों, ये भी जला डालो
    कि सब बेघर हों और मेरा हो घर, अच्छा नहीं लगता
  • उंगलियां यूं न सब पर उठाया करो
    खर्च करने से पहले कमाया करो

    ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे
    बारिशों में पतंगें उड़ाया करो

    दोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर
    नीम की पत्तियों को चबाया करो

    शाम के बाद जब तुम सहर देख लो
    कुछ फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो

    अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बांधकर
    आसमानों का ज़र्फ़ आज़माया करो

    चांद सूरज कहां, अपनी मंज़िल कहां
    ऐसे वैसों को मुंह मत लगाया करो...
  • उंगलियां यूं न सब पर उठाया करो
    खर्च करने से पहले कमाया करो

    ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे
    बारिशों में पतंगें उड़ाया करो

    दोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर
    नीम की पत्तियों को चबाया करो

    शाम के बाद जब तुम सहर देख लो
    कुछ फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो

    अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बांधकर
    आसमानों का ज़र्फ़ आज़माया करो

    चांद सूरज कहां, अपनी मंज़िल कहां
    ऐसे वैसों को मुंह मत लगाया करो...
    :p :p
  • डूबने से पहले सूरज के निकल आता है चाँद
    हाथ धो कर शाम के पीछे उजाले पड़ गए

    ~नज़ीर बाक़री
  • इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में
    ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिन से एक रात
  • इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में
    ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिन से एक रात
    कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें
    इतनी जगह कहां है दिल-ए-दा.गदार में।

    उम्र-ए-दराज मांग कर लाए थे चार दिन
    दो आरजू में कट गए, दो इंतजार में।
  • ज़िन्दगी तेरे ग़म ने हमें रिश्ते नये समझाये
    मिले जो हमें धूप में मिले छाँव के ठंडे साये

    ~गुलज़ार
  • उलझने क्या बताऊँ जिंदगी के,
    तेरे गले लगकर, तेरी ही शिकायतें करनी हैं....
  • इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में
    ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिन से एक रात
    हल्की फुल्की सी हैं जिंदगी,
    बोझ तो ख्वाहिशों का हैं...
  • जब नाश मनुज पर छाता है,
    पहले विवेक मर जाता है।

    ~दिनकर
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