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http://liveindiahindi.com/UPSC-Students-meet-minister-Jitendra-Singh-Demanded-relaxation-in-agehttp://abpnews.abplive.in/india-news/upsc-students-meet-minister-jitendra-singh-301443/http://www.pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=133434http://www.pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=1335142011 से 2015 तक किए गए सिलेबस में बदलाव, छात्रों ने मांगे 3 और मौके
Fri, 18/12/2015 --Edited By Rimmi Sharma
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न में हुए बदलाव के खिलाफ छात्र एक बार फिर एकजुट होने लगे हैं। छात्रों ने यूपीएससी परीक्षा में बैठने के लिए तीन और मौके तथा आयु सीमा में छूट की मांग सरकार से की है।
अपनी इन समस्याओं को लेकर बीते 14 दिसम्बर को करीब 100 छात्रों का एक दल कार्मिक मामलों के मंत्री जितेन्द्र सिंह से मिला। जितेन्द्र सिंह की सलाह पर छात्रों का एक दूसरा दल डीओपीटी के सचिव संथय कोठारी से भी मिला।
छात्रों की मांग है कि यूपीएससी के पैटर्न में हुए बदलावों के चलते छात्रों को हुए नुकसान की भारपाई उन्हें तीन अतिरिक्त मौके और उम्र सीमा में छूट देकर की जाए। जितेन्द्र सिंह और डीओपीटी के सेक्रेट्री ने छात्रों की बातें सुनी। जितेन्द्र सिंह ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि सरकार जल्द ही इसपर फैसला लेगी। फैसला छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा।
छात्रों का कहना है कि सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न में किए गए भारी बदलावों के चलते उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। 2011-15 के दौरान तकरीबन हर साल यूपीएससी ने अपने सिलेबस में बदलाव किए। इस साल तो प्रारंभिक परीक्षा के ठीक 3 महीने पहले तक बदलाव किया गया। यूपीएससी की इस तरह की लापरवाही के कारण लाखों का भविष्य संकट में है।
यूपीएससी ने 2011 में CSAT लागू किया था जिससे बहुत कम उम्मीदवारों को फायदा हो रहा है। लेकिन इससे अधिकांश खासकर हिंदीभाषी इलाकों के छात्रों को परेशानी हो रही है। सिविल सेवा के नए पैटर्न की समीक्षा के लिए सरकार ने निगवेकर कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि CSAT के चलते उम्मीदवारों से भेदभाव होता है।
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We hope that our demands will be addressed by the government before 2016 prelims.